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दूध-दही की शुद्धता की होगी जांच, अमृतसर में फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाई

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arvind sahu

Wednesday, June 24, 2026

दूध-दही की शुद्धता की होगी जांच, अमृतसर में फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाई

अमृतसर। आधुनिकता और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दौर में अधिक मुनाफा कमाने की होड़ ने कई लोगों को मिलावट जैसे अवैध और अनैतिक कारोबार की ओर धकेल दिया है। खाद्य पदार्थों में मिलावट का यह बढ़ता चलन अब आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। खासकर दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों में मिलावट के मामलों ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में पंजाब सरकार और फूड सेफ्टी विभाग लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते नजर आ रहे हैं।

इसी क्रम में अमृतसर में फूड सेफ्टी विभाग की टीम ने जिले के विभिन्न डेयरी प्रतिष्ठानों और दुग्ध उत्पाद निर्माताओं पर निरीक्षण अभियान चलाया। इस दौरान अधिकारियों ने दूध, दही, पनीर समेत कई डेयरी उत्पादों के नमूने (सैंपल) एकत्रित किए, जिन्हें गुणवत्ता जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।

मटिया डेयरी और सहारा डेयरी का औचक निरीक्षण


जिले के फूड सेफ्टी विभाग के अधिकारियों ने प्रमुख डेयरियों में शामिल मटिया डेयरी और सहारा डेयरी का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने डेयरी उत्पादों के निर्माण, रखरखाव और भंडारण की व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। साथ ही परिसर में साफ-सफाई, खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन और उत्पादों की गुणवत्ता की भी जांच की गई। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने दूध, दही और पनीर के नमूने एकत्रित कर उन्हें विस्तृत परीक्षण के लिए अधिकृत प्रयोगशाला भेज दिया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उपभोक्ताओं तक पहुंच रहे उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हैं।

मिलावटखोरी पर सरकार की सख्ती

पंजाब सरकार पिछले कुछ समय से खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए लगातार अभियान चला रही है। त्योहारों और विशेष अवसरों के अलावा नियमित तौर पर भी बाजारों, मिठाई की दुकानों, डेयरियों और खाद्य उत्पादन इकाइयों की जांच की जा रही है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि दूध और उससे बने उत्पादों में मिलावट सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से पेट संबंधी बीमारियों, संक्रमण, एलर्जी और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों पर इसका असर अधिक देखने को मिलता है।