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Samay Raina Supreme Court: अदालत को गुमराह करना पड़ा भारी, सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना पर लगाया 3 लाख रुपये का जुर्माना

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arvind sahu

Tuesday, July 14, 2026

Samay Raina Supreme Court:  अदालत को गुमराह करना पड़ा भारी, सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना पर लगाया 3 लाख रुपये का जुर्माना

Samay Raina Supreme Court: कॉमेडियन समय रैना की मुश्किलें कम होने के बजाय लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। पहले उन्हें अपने शो में कथित तौर पर विवादित और अश्लील सामग्री प्रसारित करने के आरोपों को लेकर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाते हुए उन पर तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना 'इंडियाज गॉट लेटेंट' विवाद से जुड़े मामले में अदालत के निर्देशों का पालन न करने और न्यायालय को गुमराह करने को लेकर लगाया गया है।

पहले 10 लाख का जुर्माना

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना के प्रति सख्त रुख अपनाते हुए टिप्पणी की कि वह किस तरह के यूथ आइकन बन रहे हैं, यह चिंता का विषय है। अदालत की कड़ी टिप्पणियों के बीच समय रैना की ओर से उनके वकील ने बिना शर्त माफी मांगते हुए अदालत से नरमी बरतने की अपील की। इसके बाद कोर्ट ने पहले प्रस्तावित 10 लाख रुपये के जुर्माने को घटाकर 3 लाख रुपये कर दिया। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सार्वजनिक मंचों पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी का निर्वहन भी उतना ही आवश्यक है।

कोर्ट इसलिए हुआ सख्त

सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख की एक बड़ी वजह समय रैना की ओर से अदालत को दिया गया वह आश्वासन था, जिस पर अमल नहीं किया गया। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया कि समय रैना ने पहले यह भरोसा दिलाया था कि वह क्योर एसएमए फाउंडेशन और स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) से पीड़ित लोगों से संपर्क करेंगे, लेकिन अब तक उन्होंने ऐसा नहीं किया। अदालत ने इसे अपने समक्ष दिए गए आश्वासन का पालन न करने के रूप में देखा, जिसके बाद कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए समय रैना के प्रति सख्त रुख अपनाया।

अंहकार को लेकर भी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान समय रैना की ओर से पेश हुए वकील ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल द्वारा कोर्ट के निर्देशों का पालन न करना किसी भी तरह के अहंकार से प्रेरित नहीं था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, "कुछ लोगों को लगता है कि विदेश में बैठकर वे भारतीय कानून से बच सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। अब उन्हें इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। अगर इसे अहंकार नहीं कहा जाएगा, तो फिर हमें ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी की परिभाषा ही बदलनी पड़ेगी।"