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10 जुलाई तक रोजाना होंगे सात राज्यों के नाटकों का मंचन, पंजाब कला भवन में जुट रहे हैं रंगमंच प्रेमी

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arvind sahu

Sunday, July 5, 2026

10 जुलाई तक रोजाना होंगे सात राज्यों के नाटकों का मंचन, पंजाब कला भवन में जुट रहे हैं रंगमंच प्रेमी

National Theatre Festival Chandigar: पंजाब कला भवन, सेक्टर-16 में शनिवार शाम रंगमंच प्रेमियों के बीच 13वें राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव 'शगुफे-2026' की शुरुआत हुई। सात दिनों तक चलने वाले इस सांस्कृतिक आयोजन का उद्घाटन चर्चित पंजाबी नाटक 'सलवाण' के मंचन के साथ किया गया। संवेदनशील विषयवस्तु, प्रभावशाली अभिनय और भावनात्मक प्रस्तुति के कारण पहले ही दिन नाटक ने दर्शकों का भरपूर ध्यान खींचा और कार्यक्रम के समापन तक सभागार तालियों से गूंजता रहा।

इंपैक्ट आर्ट्स की ओर से आयोजित इस महोत्सव को संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, नॉर्थ जोन कल्चरल सेंटर (पटियाला), हरियाणा कला परिषद और पंजाब आर्ट्स काउंसिल का सहयोग प्राप्त है। महोत्सव के दौरान 10 जुलाई तक प्रत्येक शाम 6:30 बजे देश के विभिन्न राज्यों से आई रंगमंच संस्थाएं अपनी-अपनी नाट्य प्रस्तुतियां देंगी, जिनमें सामाजिक सरोकारों से जुड़े विविध विषयों को मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।

पहले दिन 'सलवाण' का मंचन

महोत्सव के उद्घाटन दिवस पर प्रसिद्ध नाटककार अजमेर सिंह औलख की रचना 'सलवाण' का मंचन निर्देशक गुरप्रीत सिंह बैंस के निर्देशन में किया गया। कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है, जो आर्थिक तंगी और अभावों के दबाव में अपनी गर्भवती पत्नी अच्छरो को छोड़कर अपराध की राह पकड़ लेता है। समय बीतने के साथ वह आर्थिक रूप से तो सफल हो जाता है, लेकिन जब वर्षों बाद अपने अतीत की ओर लौटता है तो उसे एहसास होता है कि जिन रिश्तों को उसने पीछे छोड़ दिया था, वे अब पहले जैसे नहीं रहे। उसके फैसलों की कीमत केवल उसे ही नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार को चुकानी पड़ती है।

नाटक की कथा इस बात को रेखांकित करती है कि गरीबी केवल संसाधनों की कमी नहीं होती, बल्कि यह कई बार इंसान को ऐसे मोड़ पर खड़ा कर देती है, जहां लिया गया एक निर्णय पूरी जिंदगी की दिशा बदल देता है। प्रस्तुति यह भी बताती है कि आर्थिक सफलता हर नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती, क्योंकि एक बार टूटे विश्वास और बिखरे रिश्तों को दोबारा जोड़ना आसान नहीं होता।

गीतों की प्रस्तुति ने दर्शकों को कहानी से जोड़े रखा

संवादों के साथ पिरोए गए गीतों और संगीत ने नाटक की भावनात्मक गहराई को और प्रभावी बनाया। कलाकारों ने अपने किरदारों को पूरी संवेदनशीलता के साथ निभाया, जिससे कहानी का हर मोड़ दर्शकों तक स्वाभाविक रूप से पहुंचा। मंच सज्जा और निर्देशन की सादगी ने भी प्रस्तुति को यथार्थ के करीब बनाए रखा।

'सलवाण' केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि उन असंख्य लोगों की पीड़ा को सामने लाता है जो परिस्थितियों से हारकर ऐसे फैसले लेने पर मजबूर हो जाते हैं, जिनके परिणाम लंबे समय तक उनका पीछा नहीं छोड़ते। नाटक यह संदेश देता है कि रिश्तों की मजबूती धन-दौलत से नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और साथ निभाने की भावना से बनती है।

महोत्सव का पहला दिन इस बात का प्रमाण रहा कि रंगमंच आज भी समाज के गंभीर प्रश्नों को प्रभावी ढंग से दर्शकों तक पहुंचाने की क्षमता रखता है। आगामी दिनों में 'शगुफे-2026' के मंच पर देशभर की विभिन्न नाट्य संस्थाएं अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय सरोकारों से जुड़े कई विषयों को दर्शकों के सामने रखेंगी।