Ayodhya Ram Mandir Donation: आरोपियों की पैरवी करने वाले वकील पर लगेगा 5 लाख का जुर्माना
arvind sahu
Monday, June 29, 2026

Ayodhya Ram Mandir Donation: रामजन्मभूमि मंदिर में चंदा चोरी विवाद को लेकर देशभर में आरोपियों के खिलाफ आक्रोश देखने को मिल रहा है। प्रभु श्रीराम के असंख्य भक्तों द्वारा श्रद्धास्वरूप समर्पित दान की वस्तुओं और राशि के साथ कथित हेरफेर करने वालों को कड़ी सजा दिलाने की मांग को लेकर रामभक्त लामबंद हो गए हैं। इसी क्रम में अयोध्या-फैजाबाद के वकीलों ने सभी आरोपियों के पक्ष में किसी भी प्रकार की पैरवी करने से साफ इनकार कर दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले को लेकर फैजाबाद बार एसोसिएशन की बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि राम मंदिर दान चोरी मामले के आरोपियों की पैरवी कोई भी अधिवक्ता नहीं करेगा। यदि कोई वकील आरोपियों की ओर से अदालत में पेश होता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे अधिवक्ता को बार एसोसिएशन की सदस्यता से निष्कासित कर दिया जाएगा और उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा। इसके अलावा बैठक में मौजूद अधिवक्ताओं ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को तीन दिनों के भीतर अयोध्या छोड़ने की चेतावनी भी दी।
चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ आक्रोश
राम मंदिर चंदा विवाद में चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव का नाम सामने आने के बाद तीनों के खिलाफ देशभर में आक्रोश देखने को मिल रहा है। खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अयोध्या यात्रा के दौरान आयोजित एक अहम समीक्षा बैठक में चंपत राय को शामिल नहीं किया गया। यह बैठक ऐसे समय हुई, जब राम मंदिर दान मामले की एसआईटी जांच जारी थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चंपत राय को बैठक से दूर रखे जाने को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया कि उन्हें जानबूझकर बैठक से बाहर रखा गया था।
अब तक क्या-क्या हुआ केस में?
राम मंदिर दान में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया, जिसने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी। इसके आधार पर ट्रस्ट की शिकायत पर आठ लोगों के खिलाफ नकदी और आभूषणों की कथित चोरी, गबन और वित्तीय अनियमितताओं का मामला दर्ज किया गया तथा सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

जांच के दौरान आरोपियों के घरों पर छापेमारी में नकदी भी बरामद की गई और उनके बैंक खातों, संपत्तियों व वित्तीय लेनदेन की जांच शुरू की गई। जांच का दायरा बढ़ाते हुए बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। इस बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पद छोड़ दिए। हालांकि, विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने कहा कि उन पर इस्तीफा देने का कोई दबाव नहीं था।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अयोध्या बैठक में चंपत राय की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी। वहीं, मामले की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। फिलहाल एसआईटी पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और अभी तक किसी भी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी घोषित नहीं किया गया है।