लोहागढ़ किले में फिर लौटेगी पुणे पुलिस, केतन हत्याकांड में होगा क्राइम सीन रीक्रिएट
arvind sahu
Friday, June 26, 2026

अपराध। पुणे के चर्चित लोहागढ़ मर्डर केस में जांच एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। जानकारी के अनुसार, अपने कथित प्रेमी के साथ मिलकर मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या के आरोपों की जांच कर रही पुणे पुलिस अब पूरे घटनाक्रम को दोबारा घटनास्थल पर रीक्रिएट करेगी। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने देशभर में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था और घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।
मीडिया रिपोर्ट में जांच टीम के हवाले से बताया जा रहा है कि, पुलिस लोहागढ़ किले में उसी स्थान पर क्राइम सीन को दोबारा तैयार करेगी, जहां कथित तौर पर वारदात को अंजाम दिया गया था। इस दौरान एक डमी बॉडी का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि घटना के समय तीनों लोगों- आरोपी सिया गोयल, उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी और मृतक केतन अग्रवाल- की वास्तविक स्थिति और उनकी गतिविधियों का क्रम स्पष्ट किया जा सके।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट में होगी मामले की सुनवाई
राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उक्त पूरे मामले को लेकर फ़ास्ट-ट्रैक ट्रायल को मंज़ूरी दे दी है। वरिष्ठ वकील उज्जवल निकम इस केस के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर होंगे। हाई-प्रोफ़ाइल मर्डर केस के बाद राज्य के सीएम देवेन्द्र फडणवीस ने शुक्रवार को पुणे में मर्डर के शिकार केतन अग्रवाल के परिवार से मुलाक़ात की। इस दौरान केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने इस हाई-प्रोफ़ाइल मर्डर केस में अपने बेटे के लिए इंसाफ़ की मांग की। अब सीएम ने पीड़ित को जल्द न्याय मिल सके इसलिए उक्त मामलें को लेकर कोर्ट में फ़ास्ट-ट्रैक ट्रायल की मंज़ूरी दी हैं।
क्या है मामला ?
केतन अग्रवाल, 26 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी, की इस वर्ष की शुरुआत में सिया गोयल से सगाई हुई थी और दोनों की शादी नवंबर में तय थी। आरोप है कि सिया ने अपने कथित प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर पुणे के लोहागढ़ किले पर केतन को खाई में धक्का देकर उसकी हत्या कर दी। इस मामले में पुलिस ने सिया और चेतन को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
इस घटना के सामने आने के बाद देश में चर्चा छेड़ दी भाजपा सांसद और राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त अभिनेत्री कंगना रणौत ने भी पुरे घटनाक्रम को लेकर अपने इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा था कि, आज के दौर में किसी बच्चे के व्यवहार या संस्कार का आकलन केवल उसके परिवार या माता-पिता के आधार पर करना सही नहीं है।

उनके अनुसार, यह समझना अधिक जरूरी है कि बच्चा किन लोगों के संपर्क में रहता है, किस तरह का डिजिटल कंटेंट देखता है और सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या उसके आसपास का माहौल उसके व्यक्तित्व को किस तरह प्रभावित कर रहा है।
उन्होंने आगे लिखा कि बदलते समय में लोगों की जिंदगी कई स्तरों पर चल रही है। अधिकांश लोग समाज के सामने अपनी एक अलग और बेहतर छवि पेश करने की कोशिश करते हैं, जबकि उनकी वास्तविक सोच और जीवन उससे अलग हो सकता है। ऐसे में किसी बच्चे के व्यवहार के लिए सीधे उसके माता-पिता या परिवार को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं माना जा सकता।